अमेठी में त्रिकोणीय तो गौरीगंज में बीएसपी पड़ रही भारी

smart fonआशुतोष मिश्र, अमेठी। 2012 के चुनाव में भले ही कांग्रेस को अमेठी की पांच में से 2 ही सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन कांग्रेसी उत्साहित थे कि पूरे कैंपेन को उनकी स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी लीड कर रही हैं। लेकिन 1999 के बाद यह पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें प्रियंका गांधी एक दिन के लिए भी चुनाव प्रचार करने अमेठी नहीं आईं। राहुल गांधी भी एक दिन में तीन जनसभाएं करके लौट गए, जिसकी वजह से कांग्रेस कार्यकर्ता खामोश रहे और कांग्रेस उम्मीदवार हर सीट पर त्रिकोणीय लड़ाई के फेरे में पड़ गए। अमेठी संसदीय क्षेत्र की 5 विधानसभा सीटों में से अमेठी और गौरीगंज में कांग्रेस और सपा दोनों के उम्मीदवार खड़े हैं। गौरीगंज में इसका फायदा बीएसपी को मिलता दिख रहा है तो अमेठी में गठबंधन की वजह से बीजेपी सीधे तौर पर लड़ाई में आ गई है। नतीजतन जगदीशपुर, सलोन और तिलोई क्षेत्र में भी इसका साफ असर दिख रहा है और कहीं भी सपा और कांग्रेस एक दूसरे के साथ सहयोगी की भूमिका में नहीं दिख रहे हैं। जहां तक गौरीगंज सीट की है तो इस बार ब्राह्मïण समाज बीएसपी प्रत्याशी विजय किशोर तिवारी की ओर जाने का मन बना रहा है। मालूम हो कि गौरीगंज में करीब 90 हजार मतदाता ब्राह्मïण हैं।
जगदीशपुर से हमेशा कांग्रेस ही चुनाव जीतती आई है। 1997 में एक बार बीजेपी के रामलखन पासी ने जीत दर्ज की है। इस बार राधेश्याम धोबी कांग्रेस से, सुरेश पासी बीजेपी से और जगदत्त कोरी बीएसपी से मैदान में हैं। वहीं तिलोई से मयंकेश्वर शरण सिंह बीजेपी से,सऊद बीएसपी से और विनय मिश्रा कांग्रेस से चुनाव मैदान में है। सऊद विधायक डॉक्टर मुस्लिम के लड़के हैं तो मयंकेश्वर 2 बार विधायक रह चुके हैं। वहीं गौरीगंज में भी सपा के राकेश प्रताप सिंह, कांग्रेस से नईम और बीएसपी से विजय किशोर तिवारी के बीच लड़ाई है। बीजेपी ने उमाशंकर पांडेय को उम्मीदवार बनाया है। टिकट मिलने के बाद से ही इनका विरोध बढ़ गया था जो अभी तक थमता नही दिख रहा है। 2012 में जब सपा के गायत्री प्रजापति ने अमेठी सीट कांग्रेस से छीन ली, तो सपा ने एक बार फिर उन्हें मैदान में उतार दिया, वहीं कांग्रेस सांसद और अमेठी के राजा संजय सिंह की पत्नी अमीता सिंह भी कांग्रेस से मैदान में हैं। बीजेपी ने भी संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह को चुनावी मैदान में उतार दिया है, जिससे लड़ाई में दो रानियों के मुकाबिल वजीर खड़ा है। अमीता जिला पंचायत अध्यक्ष रहने के साथ ही तीन बार की विधायक और मंत्री भी रह चुकी हैं, वहीं गरिमा सिंह का अमेठी की सियासत से पहले कोई नाता नहीं रहा है। अब वह घर-घर जाकर लोगों से मिल रही हैं और भावनात्मक अपील करते हुए कहती हैं, ‘हमरे अचरा में इतना कमल के फूल डाय दा कि 21 साल से जोन हम शादीशुदा होइके विधवा सरीखा जिन्दगी जियत बॉटी वोकर न्याय मिल सके।Ó
पहले से ही कई आरोपों में घिरे गायत्री पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गैंगरेप का केस दर्ज हो गया। नतीजा हुआ कि सीएम प्रचार करने तो पहुंचे, लेकिन गायत्री का नाम नहीं लिया। बची-खुची कसर मुलायम ने पूरी कर दी और उन्होंने अंतिम वक्त में गायत्री के चुनाव प्रचार में पहुंचने से इनकार कर दिया।

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