खनन अपराधों के लिए बनेगी विशेष अदालत

लखनऊ। खनन से जुड़े अपराधों पर तेजी से सुनवाई और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के मामले में विशेष कोर्ट बनाने की कवायद तेज हो गई है। खनन विभाग ने इस संबंध में प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा। सरकार हाईकोर्ट की संस्तुति के बाद इसे लागू करेगी।
दरअसल, खनन से जुड़े मामले सामान्य कोर्ट में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोर्ट पर अन्य मुकदमों का बोझ अधिक है, इसलिए निस्तारण में बहुत समय लग जाता है। वहीं, प्रदेश में खनन में अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट प्रदेश सरकार और विभाग को फटकार लगा चुका है। अक्टूबर-नवंबर 2016 में हाईकोर्ट ने गड़बडिय़ों के चलते पूरे प्रदेश में खनन पर रोक लगा दी थी। साथ ही मामले की जांच सीधे सीबीआई से कराने के आदेश दिए थे। उन दिनों पूरे प्रदेश में जबरदस्त तरीके से अवैध खनन व परिवहन किया जा रहा था। खनन माफिया मोटा मुनाफा कमाने के लिए पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे थे। कई मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई लेकिन इन मामलों की सुनवाई अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
वहीं सीबीआई ने जो मामले दर्ज किए हैं, उनमें भी बहुत तेजी नहीं आ सकी है। दोषियों को सजा नहीं मिल सकी और ना ही जुर्माना आदि की कार्रवाई हुई। इन सबको देखते हुए खुद कोर्ट ने मार्च 2017 में आई नई सरकार से खनन नीति में इस मुद्दे को शामिल करने का सुझाव दिया था। सरकार ने नई खनन नीति में विशेष कोर्ट बनाए जाने का प्रावधान किया था। इसी के तहत विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है।मंडल मुख्यालयों पर हों विशेष अदालतेंविभाग का प्रस्ताव है कि सभी मंडलों पर एक विशेष खनन कोर्ट बनाई जाए। संबंधित मंडल से जुड़े जिलों में खनन आदि के मामलों की सुनवाई का अधिकार इन कोर्ट को होगा। हालांकि इन कोर्ट के क्षेत्राधिकार का अंतिम फैसला हाईकोर्ट की स्वीकृति के बाद ही होगा।

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