गायत्री मामले में 19 को अदालत देगी फैसला

लखनऊ। पाक्सो अदालत ने सामूहिक बलात्कार के आरोप में जेल में बंद उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति द्वारा खुद को क्लीन चिट दिये जाने की गुजारिश वाली एक याचिका पर आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पाक्सो अदालत के न्यायाधीश उमाशंकर शर्मा ने अपना निर्णय सुरक्षित रखते हुए इसे 19 सितम्बर को सुनाने का फैसला किया। पूर्व खनन एवं परिवहन मंत्री प्रजापति ने अपने वकील के माध्यम से अदालत में दी गयी अर्जी में कहा है कि उनके खिलाफ सामूहिक बलात्कार का मुकदमा कथित वारदात के तीन साल बाद दर्ज किया गया है, लिहाजा पाक्सो एक्ट के तहत प्रथम दृष्ट्या मामला नहीं बनता। इसलिये उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दी जानी चाहिये। अभियोजन पक्ष ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस प्रकरण में आरोप पहले ही तय हो चुके हैं और ऐसी स्थिति में यह अर्जी विचार योग्य नहीं है, लिहाजा इसे खारिज किया जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया। मालूम हो कि चित्रकूट की रहने वाली एक महिला ने प्रजापति तथा उनके साथियों पर उससे बलात्कार करने तथा उसकी बेटी के साथ भी ऐसा ही करने की धमकी देने का आरोप लगाया था। उच्चतम न्यायालय द्वारा 18 फरवरी 2017 को दिये गये आदेश पर इस मामले में लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में प्रजापति समेत छह लोग अभियुक्त बनाये गये हैं।

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