बीजेपी की रामभक्ति के मुकाबले सपा की कृष्णभक्ति

लखनऊ। यूपी के नगर निकाय के चुनाव में स्थानीय मुद्दों के बजाए मंदिरों, प्रतिमाओं और धार्मिक प्रतीक अहम होते जा रहें है। भाजपा की ‘रामभक्ति’ के मुकाबले समाजवादी पार्टी की कृष्णभक्ति राजनीति का नया मुद्दा बन गया है। इस मुद्दे के साथ गुजरात के चुनाव प्रचार में राहुल गांधी के मंदिरों में दर्शन के लिए जाने की जिसका असर नगर निकाय चुनावों पर भी पड़ रहा है। उम्मीदवार मंदिरों, देव प्रतिमाओं के सहारे वोट पाने की कोशिश कर रहें है। सैफई में स्थापित भगवान कृष्ण की 51 फिट की प्रतिमा का अभी अनावरण नही हुआ है। लेकिन राजनीति तूल पकड़ चुकी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की कृष्ण भक्ति से भाजपा गदगद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नगर निगम के चुनाव प्रचार का अभियान मंगलवार को अयोध्या से शुरू करने जा रहें है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि राम का नाम लेने पर पहले सपा और कांग्रेस के लोग बीजेपी पर वोट बैंक साधने का आरोप लगाते थे तो क्या अब कृष्ण भगवान के सहारे वोट बैंक साधा जाएगा। वैसे बीजेपी इसे पहले ही आस्था मानती थी अब भी मानती है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने सोमवार को कहा कि अखिलेश समाजवादियों के घर भी कृष्ण की मूर्ति लगवाएं। निकाय चुनाव उप्र की भाजपा सरकार और विपक्ष के लिए काफी अहम है। इन चुनावों में नगर निगमों व नगर पालिकाओं में भाजपा जबकि नगर पंचायतों में सपा को परंपरागत रूप से ज्यादा कामयाबी मिलती रही है। चुनाव के पहले ही भाजपा सरकार ने बरसाना व वृंदावन को तीर्थस्थल घोषित किया था। अयोध्या में दीपावली का आयोजन भी किया। भाजपा के धार्मिक एजेंडें के मुकाबले सपा अध्यक्ष के पैतृक गांव सैफई में कृष्ण की प्रतिमा की स्थापना की जानकारी सामने आ गई। भाजपा के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि सपा सैफई में भगवान कृष्ण की बड़ी मूर्ति स्थापित कर रही है। इससे साफ है कि वह तुष्टीकरण की राजनीति छोडक़र भगवान राम और कृष्ण की शरण में आ गई है। कांग्रेस के प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल का कहना है कि भाजपा तो जीत के लिए मुसलमानों को अपना उम्मीदवार बना रही है। जबकि वह दूसरों पर तुष्टिकरण का आरोप लगाती रही है। अग्रवाल ने कहा कि राहुल गांधी पूरी आस्था के साथ मंदिरों में जाते है। उप्र के विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भी वे मंदिरों व मजारों पर गए थे।

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