संकीर्णता नहीं, स्वस्थ राजनीतिक मुद्दें हो

ललित गर्ग। मुंबई में पिछले दो सप्ताह से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बाहर से आकर बसे और कारोबार कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक आंदोलन चला रही है, उन्हें खदेड़ रही है, उनके रोजी-रोटी को बाधित कर रही है, इस तरह अपनी राजनीति को मजबूत करने की सोच एवं रणनीति लोकतांत्रिक दृष्टि से कत्तई उचित नहीं है। देश में जातिवाद और रंगभेद आम समस्या है और हमारे लोग इसी के शिकार होते हैं। बढ़ते विस्थापन के कारण देश में कई जातियां-जनजातियां प्रवासी मजदूर बनने के लिए अभिशप्त हैं। वे चाहे बिहारी…

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यही है मोदी के आर्थिक सुधारों का प्रयोजन 

ललित गर्ग। विश्व बैंक ने भारत में विदेशी व्यापार की संभावनाओं को नई ऊर्जा दे दी है। इससे आशा की जाती है कि आने वाले समय में भारत में देसी एवं विदेशी निवेश की बाढ़ आएगी, क्योंकि दूसरे देशों की तुलना में भारत में व्यापार करना आसान हो गया है। विश्व बैंक ने व्यापार में सुगमता की वैश्विक रैंकिंग में भारत को 130 वें स्थान से उठाकर 100 वें स्थान पर स्थापित किया है। निश्चित ही यह देश के लिये आर्थिक एवं व्यापारिक दृष्टि से एक शुभ सूचना है, एक…

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महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की बदहाली क्यों?

ललित गर्ग। देश में अस्तित्व एवं अस्मिता की दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से महिलाओं के हालात बदतर एवं चिन्तनीय है। देखा जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में तमाम महिला जागृति के कार्यक्रमों एवं सरकार की योजनाओं के बावजूद महिलाओं का शोषण होता है, उनके अधिकारों का हनन होता है, इज्जज लूटी जाती है और हत्या कर देना- मानो आम बात हो गयी है। यह हालात सुदूर अनपढ़ एवं अविकसित क्षेत्रों के नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली के है और इस बात को पुष्ट करती है…

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एक महान धर्म प्रवर्तक थे

ललित गर्ग। विश्व में अनेक धर्म-सम्प्रदाय प्रचलित हैं। सभी धर्मों ने मानव जीवन का जो अंतिम लक्ष्य स्वीकार किया है, वह है परम सत्ता या संपूर्ण चेतन सत्ता के साथ तादात्म्य स्थापित करना। यही वह सार्वभौम तत्व है, जो मानव समुदाय को ही नहीं, समस्त प्राणी जगत् को एकता के सूत्र में बांधे हुए हैं। इसी सूत्र को अपने अनुयायियों में प्रभावी ढंग से सम्प्रेषित करते हुए ‘सिख’ समुदाय के प्रथम धर्मगुरु नानक देव ने मानवता का पाठ पढ़ाया। उनका धर्म और अध्यात्म लौकिक तथा पारलौकिक सुख-समृद्धि के लिए श्रम,…

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बच्चों की मौत से जुड़े सवाल

ललित गर्ग। गुजरात में विधानसभा चुनावों की गहमागहमी के बीच अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 24 घंटों के बीच आईसीयू में 9 नवजात शिशुओं की मौत पर हडक़म्प मच गया है। बदइंतजामी की वजह से अगस्त में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहनगर गोरखपुर के बीआरडी चिकित्सालय में तीन-चार दिनों के अंदर तीस से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी, जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई थी। इसके बाद महाराष्ट्र के नाशिक में पचपन बच्चों की मौत हुई। इतनी बड़ी संख्या में और बार-बार बच्चों की मौत…

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