कोरोना चेतावनी: रिपोर्ट निगेटिव मतलब सब सही नहीं

डेस्क। यदि किसी व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव है तो क्या मान लिया जाए कि ऐसा व्यक्ति किसी को कोरोना नहीं फैला सकता? वैज्ञानिक इससे कतई सहमत नहीं हैं। वे कहते हैं कि कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट सुरक्षित होने की कोई गारंटी नहीं है। बल्कि यह झूठी उम्मीद पैदा करती है। इसलिए कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट होने के बावजूद व्यक्ति को उतनी ही सावधानियां बरती चाहिए जितनी अन्य लोगों को।नेचर के ताजा अंक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, कई देशों में यह चलन देखा गया है कि लोग ऑफिस जाने, डिनर करने या अन्य आयोजनों में जाने के लिए कोरोना टेस्ट कराते हैं और नेगेटिव रिपोर्ट आने पर निश्चिंत हो जाते हैं। भारत में भी यह पाया गया कि वीआईपी शादियों एवं समारोहों में कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट के आधार पर एंट्री दी जा रही है और यह मान लिया जाता है कि समारोह में सब नेगेटिव रिपोर्ट वाले हैं तो सब सुरक्षित हैं। इसलिए वहां कोरोना फैलने का खतरा नहीं है।नेचर की रिपोर्ट में लांस एजिल्स के निदेशक पब्लिक हेल्थ बारबरा फेरर के हवाले से कहा गया है कि वहां नेगेटिव रिपोर्ट वाले लोग कोरोना के फैलने का कारण हो सकते हैं। फेरर कहते हैं कि कोई व्यक्ति गुरुवार को आरटीपीसीआर टेस्ट कराता है। शनिवार की सुबह उसे नेगेटिव रिपोर्ट मिलती है तथा वह डिनर में शिकरत करता है लेकिन असल में वह कोरोना संक्रमित हो सकता है। वे कहते हैं कि यह नेगेटिव रिपोर्ट सिर्फ यह दर्शाती है कि गुरुवार तक उसे कोरोना संक्रमण नहीं था। इसके भी आगे दो मतलब हैं। हो सकता है कि गुरुवार को सैंपल लेने के बाद वह संक्रमित हो जाए। यह भी संभव है कि बुधवार को वह संक्रमित के संपर्क में आया हो। ऐसे में गुरुवार को किए गए टेस्ट में रिपोर्ट नेगेटिव आएगी।जान हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं के दावे भी इस रिपोर्ट से मिलते-जुलते हैं। वे कहते हैं कि कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने के बाद लक्षण विकसित होने में दो-चार दिन लगते हैं। संक्रमण के पहले दिन टेस्ट किया जाए तो सौ फीसदी गलत नेगेटिव रिपोर्ट आएगी। लक्षण आने के तुरंत बाद भी 38 फीसदी गलत नेगेटिव रिपोर्ट होती है। जबकि तीन दिन बाद भी 20 फीसदी तक गलत नेगेटिव रिपोर्ट आ सकती है। संक्रमण के पांचवें दिन के बाद ही जांच में कोविड-19 वायरस को पकड़ पाना संभव होता है।