8 कलशों से होगा भगवान पाश्र्वनाथ का महामस्तकाभिषेक

बागपत, विवेक जैन। आगामी 15 अगस्त को श्री 1008 चिंतामणि पाश्र्वनाथ भगवान का निर्वाण दिवस बागपत के जैन नगर रिवर पार्क स्थित मन्दिर में बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जायेगा। प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच स्थित श्री 1008 चिंतामणि पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जनपद बागपत के सबसे सुन्दर मन्दिरों में शुमार है। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य हर किसी को अपनी और आकर्षित करता है। इस मन्दिर परिसर में आयोजित मन्दिर कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया कि कार्यक्रम का प्रारम्भ सवा नौ बजे से होगा। जिसमें श्रद्धालूगणों…

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बाबा बैद्यनाथ का पीतल के घंटो वाला अद्धभुत चमत्कारी धाम

विवेक जैन, बागपत। धार्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत की भूमि हमेशा से ही ऋषियों, मुनियों, साधु-संतो की पहली पसंद रही है। महर्षि वाल्मीकि से लेकर भगवान परशुराम जी तक ने बागपत की इस धरती पर आश्रम बनाकर ध्यान लगाया है और पूजा-अर्चना की है। जगत जननी माता सीता जी तक को शरण देने वाली बागपत की इस पुण्य धरती पर अनेकों चमत्कारी शिवलिंगों की स्थापना समय-समय पर ऋषियों-महर्षियों द्वारा विभिन्न प्रकार की पूजाओं की दृष्टि से की गयी। इन्हीं चमत्कारी शिवलिंगों में से बागपत के पाबला बेगमाबाद…

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मेरी हिमाचल यात्रा भाग 5

अमृतांशु मिश्र। विलासपुर के पंचवटी होटल से सुबह 7 हमलोग चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गये। करीब 4 घंटे की यात्रा के बाद एक ढाबे पर रुककर हमलोग नाशता किए। यहां एक ढाबा है जोकि अपनी चटनी के लिए जाना जाता है। आलू के पराठे के साथ इनकी हरी चटनी काफी स्वादिष्टï है। इस तरफ से गुजरने वाले सभी लोगों को यहां का पता है। हरी चटनी वाला ढाबा नाम से ज्यादा मशहूर है। नाशता करने के बाद दोबारा यात्रा शुरू कर दी गयी। दोपहर में करीब 1 बजे के…

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मेरी हिमाचल यात्रा-भाग 4

अमृतांशु मिश्र। लोसर में सुबह उठे तो मौसम काफी सुहावना हो गया था। आसमान एकदम नीला था। अगल-बगल के पहाड़ों पर पड़ी बर्फ धूप में चमक रही थी। यहां धूप काफी तेज होती है। इसके लिए आपको धूप का चश्मा लगाना जरूरी है। तेज हवाएं बदन में सिहरन पैदा कर रही थीं। खैर हमलोग थोड़ा बहुत खा-पीकर होटल के मैनेजरआनंद से आगे के रास्ते के बारे में जानकारी ली। आनंद ने बताया कि आप लोगों को दोपहर के पहले तक कुंजुम पास पार करना पड़ेगा नहीं तो पहाड़ों से गिरने…

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मेरी हिमाचल यात्रा भाग 3

अमृतांशु मिश्र। काजा में हम लोग रात की थकान मिटाने के बाद करीब 8 बजे सुबह सोकर उठे। मेरे साथी गणों का प्लान था कि काजा से हम लोग पिन वैली चलें मगर मेरा मन पहाड़ और ऊबड़ खाबड़ रास्तों से ऊबने लगा था इसलिए मैं पिन वैली नहीं गया मगर मेरे साथी जन चले। तब तक हमलोग होटल से नहा धोकर हिमालयन कैफे में नाशते के लिए गये। काजा में यही रेस्ट्रा सबसे अच्छा व बड़ा है। यहां हमेशा बाइकरों की भारी भीड़ रहती है क्योंकि मनाली जाने और…

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