पंचायत चुनाव में विस 2021 का अक्स: बीजेपी-सपा की टक्कर

डेस्क। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला हुआ है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल में अपना दम दिखाया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के आंदोलन से उपजे रोष के चलते रालोद ने भी अप्रत्याशित तौर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। मंगलवार रात एक बजे तक आए नतीजों के अनुसार दावा है कि भाजपा ने जिला पंचायत सदस्य की 489 सीटें और सपा ने 660 सीटें जीती हैं। हालांकि सपा को मिली सीटें वर्ष 2015 में…

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पंचायत चुनाव पर किसान आंदोलन का असर: रालोद मजबूत

डेस्क। किसान आंदोलन का असर जिला पंचायत चुनाव नतीजों पर पड़ता नजर आ रहा है। अभी तक का जो रुझान सामने आया है, उसमें मेरठ-सहारनपुर-बिजनौर सभी जगह भाजपा को रालोद टक्कर दे रहा है। कुछ स्थानों पर बसपा तो कहीं सपा के उम्मीदवार भी डटे हुए हैं। असली तस्वीर सोमवार को सामने आएगी। पहली बार दलगत आधार पर हो रहे जिला पंचायत के चुनाव की घोषणा से पहले भाजपा अच्छी स्थिति में थी। लेकिन दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के बाद राष्ट्रीय लोकदल एकाएक मुख्य मुकाबले में आ गया।…

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सैफई ने रचा इतिहास: दलित बना प्रधान

इटावा। यूपी पंचायत चुनाव 2021 में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के गांव सैफई ने भी एक नया इतिहास रच दिया है। इस गांव में 50 वर्षों में पहली बार वोट पड़े, मतगणना हुई और मुलायम सिंह परिवार के समर्थित उम्मीदवार रामफल वाल्मीकि ने जीत हासिल की। रामफल की जीत का फासला भी बहुत बड़ा रहा। उन्हें कुल 3877 वोट मिले जबकि उनकी प्रतिद्वंदी विनीता को सिर्फ 15 वोट ही मिल पाए।पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की वजह से सैफई हमेशा चर्चा में रहता है। बताया जा रहा है कि…

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जानिए किसने गढ़ा था खोला होबे का नारा

डेस्क। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की अगुआई में तृणमूल कांग्रेस ने बंपर जीत हासिल की है यानी टीएमसी ने बीजेपी की ओर से पूरी ताकत लगाए जाने के बाद भी खेला कर दिया है। चुनाव प्रचार की तरह मतगणना के बाद भी हर तरफ ‘खेला होबे’ का शोर है। 2021 का विधानसभा चुनाव इस नारे पर ही केंद्रित रहा। आइए आपको मिलवाते हैं उस शख्स से जिसने यह जिताऊ नारा दिया।इस साल जनवरी में सिविल इंजीनियर से राजनेता बने 25 वर्षीय देबांग्शु भट्टाचार्य ने ‘खेला होबे’ गाना लिखा था।…

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राजनीति के नए चाणक्य बन कर उभरे प्रशांत किशोर

कोलकाता। बंगाल में एक बार फिर से ममता बनर्जी की सरकार बनती दिख रही है। अगर बंगाल के रुझान फाइनल नतीजों में तब्दील होते हैं तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी की हैट्रिक जीत होगी और जीत का सपना संजोए भाजपा के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। अबतक के जो रुझान हैं, उससे साफ दिख रहा है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी तीन डिजिट यानी 100 के पार नहीं पहुंच पाई है।चुनाव आयोग…

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