भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार का बढ़ रहा योगदान

प्रहलाद सबनानी। भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास दर सामान्यत: उत्पादों की आंतरिक मांग पर अधिक निर्भर करती है परंतु वित्तीय वर्ष 2021-22 में विदेशी व्यापार भी भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में अपनी महती भूमिका निभाते नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत से 40,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि के वाणिज्यिक उत्पादों के निर्यात होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में किए गए 29,063 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक होने जा रहा है एवं वित्तीय वर्ष 2019-20 में…

Read More

प्राचीन भारत की आर्थिक व्यवस्था में छुपे हैं विश्व की वर्तमान आर्थिक समस्याओं के हल

प्रहलाद सबनानी। आज जब विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कई प्रकार की आर्थिक समस्याएं (मुद्रा स्फीति, नागरिकों के बीच लगातार बढ़ रही आर्थिक असमानता, बेरोजगारी, घाटे की वित्त व्यवस्था, शासन पर लगातार बढ़ रहा ऋण, आदि) उत्पन्न हो रही हैं और उनका कोई हल निकट भविष्य में दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे समय में इन विकसित देशों में ही अब आवाज उठने लगी है कि इन समस्याओं का हल यदि निकट भविष्य में नहीं निकाला गया तो इन देशों की आर्थिक स्थिति विस्फोटक हो सकती है, जो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को…

Read More

आईटीएस का शुभारंभ: ड्राइवरों को सहूलियत

नई दिल्ली। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक को कम करने और यात्रियों को बेहतर सुरक्षा मुहैया कराने के लिए एक इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का उद्घाटन किया। यह एक ऐसा सिस्टम है जो वाहन चालकों को खतरे के बारे में अलर्ट कराएगा और इससे दुर्घटना को रोका जा सकता है। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत को अपनी सडक़ इंजीनियरिंग में सुधार करने की जरूरत है क्योंकि हर साल देशभर में 5 लाख दुर्घटनाएं…

Read More

सफल आर्थिक नीतियों से देश के नागरिकों में प्रसन्नता का संचार सम्भव

प्रहलाद सबनानी। किसी भी देश की आर्थिक नीतियों की सफलता का पैमाना, वहां के समस्त नागरिकों में प्रसन्नता का संचार, ही होना चाहिए। कोई भी नागरिक सामान्यत: प्रसन्न तभी रह सकता है जब उसकी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हो जाती हो। आजकल शुरुआती दौर में तो रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की आसानी से प्राप्ति ही सामान्य जन को प्रसन्न रख सकती है। परंतु, यह अंतिम ध्येय नहीं हो सकता है। राष्ट्र तेजी से विकास करे, सम्पूर्ण विश्व में एक आर्थिक ताकत बन कर उभरे एवं…

Read More

सरकारी बैंकों को बेचना देशहित में नहीं: अनुपम

डेस्क। दिल्ली के जंतर मंतर समेत देश के कई हिस्सों में बैंककर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बैंक यूनियनों का समूह मंच यूएफबीयू द्वारा दो दिवसीय हड़ताल के अवसर पर किया गया। देशभर में बेरोजग़ारी को अहम मुद्दा बनाने वाले युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम भी जंतर मंतर के प्रदर्शन में शामिल होकर बैंककर्मियों को समर्थन दिया। इसके अलावा देशभर में ‘युवा हल्ला बोल’ के सदस्यों ने मुखरता से बैंक कर्मचारियों की आवाज़ बुलंद की। युवा नेता अनुपम का मानना है कि मुनाफा कमा…

Read More